MRP Full Form | MRP Kya Hai ?

नमस्कार दोस्तों आज हम MRP Full Form के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और MRP Kya Hai यह भी जानेंगे,इस टॉपिक पर हम विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे क्यूंकि लोगों को जानकारी ना होने के कारण कभी-कभी प्रोडक्ट की कीमत ज्यादा चुकानी पड़ जाती है। लोगों को जागरूक करने के लिए आज हम इस लेख के माध्यम से सभी को समझायेंगे की MRP को कैसे जान सकते हैं और सामान खरीदते समय क्या-क्या जानकारी होना जरुरी है।

दोस्तों पहले के ज़माने में MRP नहीं आया था,जिसकी वजह से लोगों को कुछ भी सामान खरीदने के लिए कीमत से दो तीन गुना ज्यादा पैसा देना पड़ जाता था। उदाहरण के द्वारा समझाना चाहेंगे- मान लीजिये एक सामान बना उसकी कम्पनी ने कीमत 100 रुपये रखी। लेकिन कम्पनी ने सामान के ऊपर उसकी लागत मूल्य नहीं लिखा जिसकी वजह से जितने दूकानदार के पास प्रोडक्ट पहुंचा वो उसकी कीमत बड़ाते गए। जिसकी वजह से उस सामान की कीमत 100 रुपये से बड़कर 200 300 रुपये तक पहुँच जाती थी।

लेकिन जबसे MRP को लाया गया तबसे ऐसा होना बंद हो गया। लोगों को सही कीमत पर सामान मिलने लगा और उनकी बचत भी होने लगी। चलिए अब हम विस्तार से जानेंगे MRP Kya Hai और MRP Full Form के बारे में भी जानेंगे।

 

MRP Full Form

सबसे पहले MRP के बारे में जानने के लिए हमे MRP Full Form के बारे में पता होना चाहिए। इसलिए हम आपको इसका फुलफॉर्म भी बता दे रहे हैं। दोस्तों MRP का फूल फॉर्म “Maximum Retail Price” होता है। हिंदी में एमआरपी को हम अधिकतम कीमत कह सकते हैं। अगर किसी भी प्रोडक्ट पर एमआरपी पड़ा हुआ है तो प्रोडक्ट की कीमत उस एमआरपी से ज्यादा नहीं हो सकती है।

 

MRP Kya Hai ?

दोस्तों जैसे की हमने आपको एमआरपी का फुल फॉर्म बता ही दिया हैलेकिन एमआरपी क्या है यह भी जानना आपके लिए उतना ही जरुरी है, क्यूंकि यह रोजमर्रा की जिंदगी के साथ सभी लोगों के साथ जुड़ा हुआ है। कहीं न कहीं हर व्यक्ति कुछ न कुछ खरीदता रहता है अगर उनके पास एमआरपी का पूरा ज्ञान होगा तो उनको कभी भी प्रोडक्ट की कीमत से ज्यादा रुपये नहीं देने पड़ेंगे।

एमआरपी को हम maximum retail price कहते हैं अर्थात जब कम्पनी अपना प्रोडक्ट बनाती है और उसे मार्किट में बेचती है। तब उस प्रोडक्ट के ऊपर एक अधिकतम कीमत को लिख देती है ताकि किसी भी उपभोक्ता को लिखी हुयी कीमत से ज्यादा का भुगतान ना करना पड़े।

एमआरपी भारत में 2006 में आया था, इसे सरकार ने ही एक नियम के तौर पर बनाया था। क्यूंकि पहले के ज़माने में कंपनियां जब भी प्रोडक्ट बनाती थी तो प्रोडक्ट पर कीमत को नहीं लिखती थी। जिसकी वजह से सामान खरीदने वाले बिचौलिए प्रोडक्ट की कीमत को बढ़ाते चले जाते थे।

बिचौलिए जब कीमत बड़ा देते थे तो उपभोक्ताओं को अपनी कमाई से सामान खरीदने के लिए ज्यादा कीमत का भुगतान करना पड़ता था। जो की एकदम गलत था और इललीगल था। सरकार ने बिचौलिए द्वारा प्रोडक्ट की कीमत बढ़ने के कारण एक नियम बनाया।

वह नियम MRP के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसके अंतर्गत कोई भी बिचौलिया लिखी हुयी एमआरपी से ज्यादा कीमत पर सामान नहीं बेच सकता है। एमआरपी का सीधा फायदा उपभोक्ता को मिला जिससे उनको ज्यादा फायदा होने लगा और उनकी आय बचने लगी।

सरकार ने जब एमआरपी नियम बनाया तब हर एक कम्पनी को यह बोल दिया गया की जब भी प्रोडक्ट बनाया जायेगा उस प्रोडक्ट को मार्किट में लाने से पहले उसकी एमआरपी कीमत को उस प्रोडक्ट पर लिख दिया जायेगा। ऐसा करने से कोई भी प्रोडक्ट एमआरपी कीमत से ज्यादा नहीं बिकता है।

सरकार ने यह क़ानून उपभोक्ता को ध्यान में रखकर बनाया था। जिसकी वजह से आज तक सभी उपभोक्तओं को इसका सीधा फायदा मिल रहा है।

उदाहरण – कम्पनी ने एक प्रोडक्ट बनाया 100 रुपये का और प्रोडक्ट पर एमआरपी लिख दिया 300 रुपये का। कम्पनी ने जब यह एमआरपी निर्धारित किया तब कम्पनी ने अपनी लागत खर्च फायदा सब पहले ही जोड़ लिया था। इस तरह से एमआरपी निर्धारित किया जाता है और बिकने वाला प्रोडक्ट लिखे हुए एमआरपी 300 रुपये से ज्यादा नहीं बेचा जा सकता है।

अगर कोई भी दुकानदार एमआरपी से ज्यादा कीमत पर प्रोडक्ट को बेचता है तो वो पूरी तरह से धांदलेबाज़ी है। आप चाहें तो दूकानदार के खिलाफ एक्शन भी ले सकते हैं। ऐसा करने पर दुकानदार के खिलाफ पेनल्टी भी लग सकती है या जेल भी हो सकती है या दोनों भी हो सकती है।

 

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MRP कौन निर्धारित करता है  

दोस्तों अब तक आपको समझ आ चूका होगा की MRP Kya Hai और MRP Full Form क्या है। अब हम जान लेते हैं की कौन एमआरपी को तय करता है। किसी भी प्रोडक्ट की एमआरपी को निर्धारित या तय करने के लिए प्रोडक्ट को बनाने वाला मालिक या कम्पनी जिम्मेदार होती है। क्यूंकि कम्पनी द्वारा ही MRP को तय किया जाता है तब जाकर प्रोडक्ट को मार्किट में बेचा जाता है।

एमआरपी पहले के ज़माने में नहीं होता था इसलिए अपनी मन मर्जी के हिसाब से उपभोक्ता को लूटा जाता था। लेकिन सरकार के एमआरपी नियम को लाने के बाद सब बदल गया और सभी कम्पनी एक निर्धारित कीमत पर लोगों को प्रोडक्ट बेचने लगी।

 

ब्लॉग्गिंग के लिए आप इस Link पर जाकर ज्यादा जानकारी ले सकते हैं।

 

MRP नियम लाने का उद्देश्य 

सरकार द्वारा एमआरपी नियम लाने का एक ही उद्देश्य था और वह था की उपभोक्ता को उचित कीमत पर सामान मिलता रहे। सरकार नही चाहती थी की कोई भी बिचौलिया किसी भी नागरिक को लूट सके। इसलिए सरकार ने 2006 में ही एमआरपी नियम को लागू कर दिया था।

अभी भी बहुत सी जगह हैं जहाँ लोगों को एमआरपी का मतलब भी नहीं पता है। इसलिए जो लोग मेरे लेख पढ़ रहे हैं उनसे गुजारिश है की वह हर किसी को जागरूक करते रहे और सभी लोगों को समझाते रहे। खासकर जो लोग गाँव में रहते हैं वो लोग अपने आस-पड़ोस में जहाँ भी एमआरपी से ज्यादा कीमत पर सामान बेचा जा रहा है। वह उन दूकानदार के खिलाफ एक्शन ले और हरगिज भी ऐसा ना होने दे।

 

MRP के फायदे 

दोस्तों अभी तक हमने एमआरपी से सम्बंधित विभिन जानकारियों को जाना है। लेकिन अब हम जान लेते हैं की एमआरपी से होने वाले फायदे कौन-कौन से हैं। जो की निम्नलिखित हैं –

  • अधिकतमदर्शाये एमआरपी कीमत से ज्यादा पर सामान को नहीं बेचा जा सकता है।
  • एमआरपीसे ज्यादा आपको कोई सामान बेचता है तो आप उसके खिलाफ FIR करवा सकते हैं।
  • एमआरपीक़ानून उपभोक्ता की रक्षा के लिए बनाया गया है।

 

MRP के नुक्सान 

दोस्तों अगर किसी भी चीज़ के फायदे हैं तो नुक्सान भी जरूर होंगे। इसके लिए हम यहाँ कुछ नुक्सान भी बताएँगे लेकिन यह नुकसान दूकानदार के लिए होंगे, उपभोक्ता के लिए बिलकुल भी नहीं हैं। जो की निम्नलिखित हैं –

  • कम्पनीका प्रोडक्ट बेचने से पहले एमआरपी का अच्छे से निर्धारित नहीं करना।
  • टैक्सेज,चार्जेजआदि को एमआरपी से पहले ना निकालना।
  • सामानपहुँचाने और लाने का भाड़ा पहले ही ना निकालना जिससे एमआरपी निर्धारित होते समय फायदा नहीं निकाल पाना।

 

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अंतिम शब्द

दोस्तों आज हमने MRP Full Form और MRP Kya Hai से सम्बंधित विभिन जानकारियों को विस्तार से जाना है। हमने अपने इस लेख में लोगों को ख़रीदे गए प्रोडक्ट्स पर ज्यादा कीमत देने से बचने के लिए बताया है। एमआरपी नियम सभी लोगों को जानना जरुरी है ताकि वह दुकानदार द्वारा कभी भी ना ठगे जाएँ।

आशा करते हैं की आपको एमआरपी से जुडी सभी बातें अच्छे से समझ में भी आ चुकी होंगी। फिर भी आप कुछ प्रश्न करना चाहते हैं तो हमे Comment box में जाकर भी पूछ सकते हैं। अगर आप हमसे पर्सनली कुछ पूछना चाहते हैं तो हमे Contact Us पेज में जाकर पूछ सकते हैं।
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धन्यवाद !

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